तेरी राह चलते चलते ,
मेरा इश्क़ इबादत हो गया .II
मंज़िल थी कुछ और ,
रास्ता कुछ और हो गया II
तेरा साथ मेरी ज़िन्दगी ,
मेरी ज़िन्दगी तेरी दुआ है II
फस्ल-ए- कर्म दीखता है खुदा का ,
असर कुछ ऐसा हुआ है II
पनाह मिली तेरे साये में ,
तो हाल कुछ ऐसा हो गया II
तुझमे ही खुदा को पाया है I
मेरा इश्क़ इबादत हो गया II.
हिमानी शर्मा

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