Friday, November 20, 2015
तेरा रूठना लाज़मी है , मेरा मनाना लाज़मी हैI
तेरा रूठना लाज़मी है , मेरा मनाना लाज़मी हैI
तेरी मुस्कुराहट पर मेरा मर जाना लाज़मी हैII
हर खता को मेरी हँसकर भुलाया है तूने I
तेरे गुस्से को मेरा हँसकर पी जाना तो लाज़मी है II
याद करते हैं लोग मुझे कुछ इस तरह ,
कि एक नादान लड़की जिसकी बातो में बस तुम थे I
खैर ! वो भी तो अपने हैं ,
उनका ये उलाहना लाज़मी है II
मैंने देखा है मेरा दर्द तेरी आँखों में इस क़दर
कि मेरे ज़िक्र में तेरी फ़िक्र का आ जाना लाज़मी है II
तेरी मुस्कुराहट पर मेरा मर जाना लाज़मी हैII
हर खता को मेरी हँसकर भुलाया है तूने I
तेरे गुस्से को मेरा हँसकर पी जाना तो लाज़मी है II
याद करते हैं लोग मुझे कुछ इस तरह ,
कि एक नादान लड़की जिसकी बातो में बस तुम थे I
खैर ! वो भी तो अपने हैं ,
उनका ये उलाहना लाज़मी है II
मैंने देखा है मेरा दर्द तेरी आँखों में इस क़दर
कि मेरे ज़िक्र में तेरी फ़िक्र का आ जाना लाज़मी है II
Monday, November 16, 2015
Sunday, October 18, 2015
तेरी राह चलते चलते
तेरी राह चलते चलते ,
मेरा इश्क़ इबादत हो गया .II
मंज़िल थी कुछ और ,
रास्ता कुछ और हो गया II
तेरा साथ मेरी ज़िन्दगी ,
मेरी ज़िन्दगी तेरी दुआ है II
फस्ल-ए- कर्म दीखता है खुदा का ,
असर कुछ ऐसा हुआ है II
पनाह मिली तेरे साये में ,
तो हाल कुछ ऐसा हो गया II
तुझमे ही खुदा को पाया है I
मेरा इश्क़ इबादत हो गया II.
हिमानी शर्मा
Tuesday, October 13, 2015
Mushkilaat bhi ayengi, Swalaat bhi honge, Mohhabat me padne vaale ,tum vaahid shks to nhi...!!! #Himani_Sharma
Mushkilaat bhi ayengi, Swalaat bhi honge,
Mohhabat me padne vaale ,tum vaahid shks to nhi...!!!
Mohhabat me padne vaale ,tum vaahid shks to nhi...!!!
Wednesday, October 7, 2015
Tuesday, October 6, 2015
Wednesday, September 30, 2015
Usse raabta RAKH
Usse Raabta rakh,
Ek pal aisa bhi aata h...
ki toot jaata hai tu..
or har zarra khuda ho jata h.
Ek pal aisa bhi aata h...
ki toot jaata hai tu..
or har zarra khuda ho jata h.
Himani Sharma Shayri
Mushkilaat bhi ayengi, Swalaat bhi honge,
Mohhabat me padne vaale ,tum vaahid shks to nhi...!!!
Mohhabat me padne vaale ,tum vaahid shks to nhi...!!!
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Monday, July 27, 2015
मेरी तरबियत पर उंगली वो शख्श क्या उठाएगा I सुना है माँ बाप उसके दारुज़ईफ़ों में रोया करते हैं II
मेरी तरबियत पर उंगली वो शख्श क्या उठाएगा I
सुना है माँ बाप उसके दारुज़ईफ़ों में रोया करते हैं II
Himani Sharma
Himani Sharma
Thursday, July 9, 2015
बहुत कुछ कहना चाहा उसने
बहुत कुछ कहना चाहा उसने और कहा भी था एक बार l
तेरे साथ मिले गर ज़िंदगी मैं जी जाऊं सौ सौ बार ll
पर वक़्त था कुछ ऐसा जब जब मैंने हाथ बढ़ाया है l
हर बार गलत फहमियां थीं , कभी उस पार कभी इस पार ll
तेरे साथ मिले गर ज़िंदगी मैं जी जाऊं सौ सौ बार ll
पर वक़्त था कुछ ऐसा जब जब मैंने हाथ बढ़ाया है l
हर बार गलत फहमियां थीं , कभी उस पार कभी इस पार ll
waqt ki raftaar
सैलाब-ए-समंदर आँखों में.
लब पर हर पल मुस्कान नयी ,
रफ़्तार जो वक़्त पकड़ता है,
सपने धुंधला जाते हैं कई .
Bahut kuch kehna chaaha usne,,
Bahut Kuch Kehna Chaaha Usne or Kaha Bhi Tha Ek Baar,
Tere Saath Mile Gar Zindgi Main Jee Jaau Sau Sau Baar,
Pr Waqt Tha Kuch Aisa Jab Jab Maine Haath Badhaya Hai,
Har Baar Galat Fehmiyaan Thin, Kabhi us Paar Kabhi is Paar.
Tere Saath Mile Gar Zindgi Main Jee Jaau Sau Sau Baar,
Pr Waqt Tha Kuch Aisa Jab Jab Maine Haath Badhaya Hai,
Har Baar Galat Fehmiyaan Thin, Kabhi us Paar Kabhi is Paar.
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