Friday, November 20, 2015

तेरा रूठना लाज़मी है , मेरा मनाना लाज़मी हैI

तेरा रूठना लाज़मी है , मेरा मनाना लाज़मी हैI
तेरी  मुस्कुराहट  पर  मेरा मर जाना लाज़मी हैII
 हर खता को  मेरी    हँसकर भुलाया है तूने I
तेरे गुस्से को मेरा हँसकर पी जाना  तो लाज़मी है II
याद करते हैं लोग  मुझे  कुछ   इस तरह ,
कि  एक नादान लड़की जिसकी  बातो में बस तुम थे I
खैर ! वो भी   तो अपने हैं ,
उनका ये  उलाहना लाज़मी है II
मैंने देखा है मेरा दर्द तेरी आँखों में इस क़दर
कि मेरे ज़िक्र में तेरी फ़िक्र का आ जाना लाज़मी है  II

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